विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अभियंता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, व्यापारी या धर्मशास्त्री तैयार करना ही नहीं होगा, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना भी होगा जिनका चरित्र उच्च, निष्ठा अडिग और सम्मान पूर्ण हो, और जिनका सम्पूर्ण जीवन-व्यवहार यह प्रमाणित करे कि वे एक महान विश्वविद्यालय की पहचान अपने भीतर धारण किए हुए हैं।
एक शिक्षण विश्वविद्यालय अपना दायित्व केवल आधा ही निभाता है यदि वह अपने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ उनके हृदय-बल के विकास के लिए समान रूप से प्रयत्नशील न हो। इसी कारण प्रस्तावित विश्वविद्यालय ने युवाओं में चरित्र-निर्माण को अपने प्रमुख उद्देश्यों में से एक के रूप में स्वीकार किया है।