प्रशासन - परिचय

प्रशासन

आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जिसे संसद के ‘प्रौद्योगिकी संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2012’ के तहत 29.06.2012 की राजपत्र अधिसूचना (गज़ट अधिसूचना) के माध्यम से मान्यता मिली है। सभी आईआईटी का प्रशासन केंद्रीय रूप से आईआईटी परिषद द्वारा किया जाता है, जो भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष निकाय है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्री इस परिषद के अध्यक्ष होते हैं।

संस्थान के समग्र प्रशासन के लिए एक ‘संचालक मण्डल’ होता है।

संस्थान की शैक्षणिक नीति का निर्णय ‘सीनेट’ करती है, जिसमें संस्थान के सभी आचार्य (प्रोफेसर) शामिल होते हैं। यह पाठ्यक्रम, कोर्स, परीक्षाओं और परिणामों को नियंत्रित और अनुमोदित करती है। यह समय-समय पर विशिष्ट शैक्षणिक मामलों को देखने के लिए समितियां नियुक्त करती है। सुविधाओं को बेहतर बनाने और मानकों को बनाए रखने के लिए संस्थान के विभिन्न विभागों की शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। संस्थान के निदेशक सीनेट के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

संस्थान के अन्य वैधानिक प्राधिकरण ‘वित्त समिति’ और ‘भवन एवं निर्माण समिति’ हैं।

संस्थान में एक निदेशक, 5 अधिष्ठाता (शैक्षणिक मामले, संसाधन और पूर्व छात्र, अनुसंधान और विकास, छात्र मामले और संकाय कार्य), कुलसचिव, विभागों के प्रमुख और स्कूलों के समन्वयक होते हैं, जो संस्थान के विभिन्न कार्यों को पूरा करते हैं। अधिष्ठाता, कुलसचिव, विभागों के प्रमुख और समन्वयक निदेशक को रिपोर्ट करते हैं।

निदेशक संस्थान के मुख्य शैक्षणिक और कार्यकारी अधिकारी होते हैं। निदेशक संस्थान के उचित प्रशासन और वहां शिक्षा प्रदान करने तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

कुलसचिव संस्थान के रिकॉर्ड, फंड और अन्य संपत्तियों के संरक्षक होते हैं। वह संचालक मण्डल, सीनेट, वित्त समिति और भवन एवं निर्माण समिति के सचिव भी होते हैं।

काम के बंटवारे के अनुसार उप कुलसचिव/सहायक कुलसचिव अधिष्ठाता/कुलसचिव को रिपोर्ट करते हैं। अधिष्ठाता, कुलसचिव, विभागों के प्रमुखों और स्कूलों के समन्वयकों को आवश्यक शक्तियां सौंपी गई हैं, और वे अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी होते हैं।